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बिटकॉइन · पाठ 1, कुल 20

डिजिटल पैसे की समस्या

डिजिटल फ़ाइल की जितनी चाहें उतनी प्रतियाँ बनाई जा सकती हैं। पैसे के लिए यह एक समस्या है: अगर डिजिटल सिक्का सिर्फ़ एक फ़ाइल हो, तो उसे दो बार खर्च किया जा सकता है। इसे दोहरा खर्च कहते हैं।

पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक भुगतान इस समस्या को एक भरोसेमंद बिचौलिये, यानी बैंक, के ज़रिये हल करते हैं। बैंक शेष राशि का खाता रखता है और हर लेनदेन को मंज़ूरी देता है।

बिटकॉइन ने एक अलग समाधान पेश किया: हज़ारों स्वतंत्र कंप्यूटरों द्वारा रखा गया एक सार्वजनिक खाता, जो किसी केंद्रीय संस्था के बिना इस पर सहमत होता है कि कौन से लेनदेन मान्य हैं।

सवाल

1. दोहरा खर्च क्या है?

एक ही डिजिटल सिक्के को दो बार खर्च कर पाने की संभावना

फ़ाइल की नकल आसानी से बनती है, इसलिए साझा खाते के बिना एक ही सिक्का दो बार खर्च हो सकता है।

2. पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक भुगतान इस समस्या को कैसे हल करते हैं?

एक भरोसेमंद बिचौलिये के ज़रिये, जो शेष राशि का खाता रखता है

बैंक शेष राशि दर्ज करता है और हर लेनदेन को मंज़ूरी देता है।

3. बिटकॉइन ने कौन सा समाधान पेश किया?

कई स्वतंत्र कंप्यूटरों द्वारा रखा गया सार्वजनिक खाता

कई प्रतिभागियों की सहमति बिचौलिये की जगह लेती है।

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